गूगल ने पहले भी कई वेब सेवाएं लांच कीं, जो बाद में फुसफुसा पटाखा ही साबित हुईं। जैसे-
गूगल वेव: इसमें ढेरों फ्यूचरिस्टिक सेवाएं थीं। रियल टाइम में एडिटिंग पर निगाह रखना, आसान शेयरिंग, स्पेलिंग और ग्रामर चैक आदि, लेकिन यह यूजर्स के बीच असफल रही।
गूगल नॉल: जानकारी को शेयर करने के लिहाज से इस सेवा को शुरू किया गया था, मगर कुछ दिनों बाद इससे भी यूजर्स ने दूरी बना ली है।
ऑर्कुट: 2004 में शुरू हुई यह सोशल साइट ब्राजील और भारत के युवाओं में बेहद लोकप्रिय हो रही थी, मगर फेसबुक और माइस्पेस में मौजूद असीमित वीडियो अपलोड जैसे फीचर्स की कमी की वजह से दौड़ में पीछे छूट गई है।
वेब एस्सेलरेटर: गूगल का दावा है कि यह इंटरनेट स्पीड को 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है, परंतु विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक हाई स्पीड के ब्रॉडबैंड और ब्राउजरों में इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। इसका प्रयोग गूगल मार्केट रिसर्च टूल के रूप में करता है।
गूगल आंसर्स: याहू! आंसर्स की तर्ज पर गूगल आंसर्स भी कभी जीवंत था। लेकिन जवाब के एवज में शुल्क वसूलने से फोकटिया वेब यूजर्स में पैठ बनाने में यह पूरी तरह नाकामयाब रहा।
गूगल चेकआउट: जून 2007 में इसे ई-बे के पेपैल के विकल्प के रूप में लांच किया गया था। यह चल तो अभी भी रहा है, मगर लोकप्रिय नहीं है और इसके यूजर्स की संख्या भी कम है।
गूगल वीडियो: वीडियो साझा करने वाली साइट गूगल वीडियो को तो गूगल द्वारा यू-ट्यूब के अधिग्रहण के बाद बंद होना ही था, परंतु यह असफल सेवा कभी भी लोकप्रिय नहीं हो पाई। जटिल होने के अलावा इसमें वीडियो को विभिन्न प्लेटफॉॅर्म में शेयरिंग के विकल्प नहीं थे।
इनके अलावा गूगल की बज, लाइवली, डॉजबॉल, जाइकू, ओपन सोशल आदि सेवाएं भी स्थान बनाने में असफल रहीं।
गूगल की असफल सेवाएं
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